इधर उधर बिखरे सुमनोंसे कि यह गुरुपूजा
इधर उधर बिखरे सुमनोंसे,
कि यह गुरुपूजा ||धृ ||
यहां खडे है नतमस्तक कर
शिव प्रताप तेजस्वी नरवर
यहां खडे है गोविद गुरुवर
यही है केशव शिवसरजा ||१||
यहां जले दीपक जीवन के,
गढ चित्तोड के उन युवतीनके,
फुल चढे हैं लाल गुरुके,
जिन्होने मृत्यू सुखद समझा ||२||
लाकर समिधा नीज यौवन की
यग्याहुती दे सौख्य सपन की
रखी दक्षिणा तन-मन-धन की
क्या तू दे सकता दे जा ||३||
साक्षी बन इस होम हवन के
मंत्र सिखा उज्वल जीवन के
दीपक बन दिन रात जलन के
आजा राष्ट्रपुरुष आ जा ||४||
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