जवान का निशान है, ये हाथ में मशाल...

जवान का निशान है, ये हाथ में मशाल,
मुदित मातृभूमी है, देश है निहाल ||धृ ||

ज्ञान कि मशाल अंधकार चीर दे,
शील का प्रहार अनाचार चीर दे,
एकता का घोष आज गगन में उछाल ||

धर्मवीर देश के मचल-मचल बढे,
खिचे तूनीत तीर अब कमान पर चढ़ें,
वेधना है लक्ष आज कुटील ओ कराल||

*ज्वार लोक चेतना का अब जवान है*,
*देश का विधान और जन महान है*,
जाती, पंथ, भाषा भेद हो सभी निढाल ||

स्वाभिमान देश कार्य नित जवान है,
भूमि अंतरिक्ष अपना सब जहान है,
मस्त नौजवान बढ़ते झूमते प्रवाल।।

मुदित मातृभूमी है, देश है निहाल...

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